Tuesday, 6 January 2026

हम कलाकार है , भक्त है , या शास्त्रानुयायी?

हम कलाकार है , भक्त है , या शास्त्रानुयायी?

Picture credit Chatgpt AI 

12.01.2024

2 years ago... from today 6.1.2026

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हमारे यहा केवल *एक हि व्यक्ति को ये आश्चर्यकारक यशस्विता irregularly irregular रूप में क्यू प्राप्त होती है?* सभी को क्यू नहीं? यह अपवाद क्यू है, निरपवाद नियम या सार्वत्रिक निश्चित अनुभूति एवं दृढ विश्वास क्यू नहीं?


*हम कलाकार है , भक्त है , या शास्त्रानुयायी?*


वैद्य हृषीकेश म्हेत्रे 

एम डी आयुर्वेद, एम ए संस्कृत

आयुर्वेद क्लिनिक पुणे & नाशिक

12.1.2024

9422016871


एक दिन श्वास पर कुछ प्रस्तुति हुई थी ग्रुप में , शायद वेगावस्था के बारे में।

कई विभिन्न और अन्यान्य योगों का उल्लेख हुआ।

किंतु शास्त्र/संहिता में उल्लेखित चिकित्सा क्रम एवं तत्रोक्त कल्प (वमन, अवश्यं स्वेदनीयानामस्वेद्यानामपि क्षणम्स्वेदयेत् , लवण युक्ततैल उर:पृष्ठअभ्यंग , इन बातो) का उल्लेख हि नहीं हुआ ।


कोई दुष्कर केस जब कोई सक्सेसफुली ट्रीट करता है, तो हमारे यहा आश्चर्य कुतूहल 😱🤔🙄 व्यक्त होता है । *"किंतु यह तो एक सामान्य बात होनी चाहिये ।"*


प्राय ऐसी केसेस एक सुनिश्चित सर्वमान्य सर्वज्ञात निदान *मॉडर्न मेडिसीन* में उपलब्ध होता है, जिसके तुलना/आधार से हि सक्सेसफुली ट्रीट की हुई केस का अभिनंदनमूल्य निश्चित होता है । *"अगर उसी चीज/केस का आयुर्वेद परिभाषामें निदान बताये तो अभिनंदनमूल्य अनायास हि कम या शून्य होता है ।"*


32 वर्ष पूर्व पुणे के एक वैद्य ने कॅन्सर ठीक किया ऐसी न्यूज पेपर में छपी थी । *"किंतु उसी वैद्यने जब उसने किया हुआ निदान, आयुर्वेद परिभाषामें बताया, तो फिर उस निदान का कोई अभिनंदनमूल्य नहीं बचा था।"*


आज भी पहले कोई आयुर्वेद निदान बताकर केस प्रेझेंट करे और कुछ देर बाद या दूसरे दिन उसका मॉडर्न डायग्नोसिस बताये तो अभिनंदनमूल्य भिन्न रहेगा ।


तो फिरसे मूल प्रश्न यह है कि,

*हम कलाकार है , भक्त है , या शास्त्रानुयायी?*


1

जिसका सभी को, सर्व काल, निरपवाद , एकसमान अनुभव आता है और उसका कार्यकारणभाव स्पष्ट रूप से प्रमेय(ज्ञेय) व अभिधेय(शब्दो में बता सकते) होता है , तथा जिस अनुभव को उसी रूप में पुनरावर्तित कर सकते है ; उसे *शास्त्र/सायन्स* कहते है (कह सकते है / कहना उचित होगा / होगा क्या?) ।

उदा. शीत से वात वृद्धि, उष्ण से वातशमन

2+2=4

100℃ में पानी बाष्प होता है, 0℃ में पानी जम जाता है

विद्युतप्रवाह शुरू है ऐसी अनावृत्त तार को अनावृत्त हात से छूने पर झटका लगता है


2

कला या भक्ति वह है जो साधन /करण समान होने पर भी हर व्यक्ति को भिन्न अनुभव होता है ।

गायन वादन नृत्य क्रिकेट 

तबला वही हो, झाकीर हुसेन बजाये तो और मैं या आप बजावो तो आनेवाला अनुभव भिन्न है

बॅट बॉल वही है, तेंडुलकर खेले तो 4 या 6 , मैं या आप खेलो तो क्लीन बोल्ड


3

मॉडर्न मेडिसीन में रुग्ण परीक्षण , निदान, ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल दुनिया सभी जगह एकसमान होता है । चाहे वहा पर हेतु लक्षण व औषध की विभिन्नता अनंत है, फिर भी सार्वत्रिक मतैक्य/एकवाक्यता होता है ।


4

हमारा *किस्सी भी* चीज पर मतैक्य/एकवाक्यता *कभ्भी भी* होता हि नहीं है, हम उलझते हि जाते है, हम *कभी किसी निर्णय पर तो आते हि नहीं है* । और हमारे यहा तो दोष धातु मल गुण रस महाभूत इनकी संख्या मर्यादा/निश्चित है । 

फिर भी ...

हेतु, दोष, दूष्य, धातु, अवस्था, साध्यता, संभाव्य उपद्रव/रोग्यसंकर/complications, चिकित्साक्रम, चिकित्साकल्प, उपशय कालावधी, लाभ स्वरूप, लाभ मर्यादा इन में से हर चीज पर मतभिन्नता या दुविधा या अनिश्चिती !?!?


4

किसी दुष्कर case को ट्रीट करने पर मॉडर्न मेडिसीन में आश्चर्य नहीं होता है । क्यूकि ऐसी कल्पनातीत केसेस को रोज पूरी दुनिया में सैकडो जगह ट्रीट किया जा रहा होता है ।


5

किसी दुष्कर case को ट्रीट करने पर , हमारे यहा पूरा दिन 👍🏼💐👌🏼👍🏼👏🏼 चलता रहता है । *होना तो आत्मविश्वास/निश्चितबुद्धि चाहिये । ... पर होता आश्चर्य या विभ्रम हि ।*


जिसे उस केस कि यशस्वितापर विश्वासहो जाता है, उसे *आश्चर्य* लगता है।वह 👍🏼💐👌🏼👍🏼👏🏼 करता है ।


वह जिसे विश्वास नहीं हो पाता है , वह *विभ्रम* में पडकर उस पर स्वयं के मॉडर्न मेडिसीन के ज्ञान के आधार पर यथासंभव उस केस की यशस्विता को असिद्ध / झुठलाने / अपर्याप्त बताने का प्रयास करता है।


क्या हम कभी 

"यस्य कस्य तरोर्मूलम् ... यद्वा तद्वा भविष्यति" ... से

*इदमेवौषधम् अस्मै , अनेनैव हि मिश्रितम् ।*

*कालेsस्मिन्नेव दत्तम् स्यात् , इदमेव भविष्यति ।।*

यहा तक कब पहुचेंगे ???


सारांश

1

प्रस्थापित/पूर्वज्ञात निदान जो मॉडर्न मेडिसिन द्वारा किया गया है, उसकी उपलब्धता पर हि हमारा अभिनंदनमूल्य/यशस्विता/benchmark निर्धारित होता रहेगा क्या?

2

मॉडर्न मेडिसिन कृत निदान/डायग्नोसिस के बिना , किये गये आयुर्वेदीय निदान एवं चिकित्सा की validity/सत्यापना/assessment criteria कैसे स्वीकार होगी?

3

मॉडर्न मेडिसिन के निदान उपकरण (सोनोग्राफी MRI), निदान प्रक्रिया (blood investigation, histopathology, PET Scan) के बिना मात्र आयुर्वेदनिदान विधी से malignancy pcos हॉर्मोनविकृती या कम से कम प्रेग्नन्सीका *सुनिश्चित अव्यभिचारी निदान* (मॉडर्न या आयुर्वेद परिभाषा में हि सही) करना संभव है ? और जो भी निदान किया है , उसका फलमूल्य (असेसमेंट of result) भी क्या हम तय करने की क्षमता रखते है, क्या हम ये पेशंट को आश्वस्त कर सकते है कि वह रोगमुक्त है (पूर्णतः या इतने अंश तक), जैसे मॉडर्न मेडिसिन बता सकता है और वह बतायी हुई बात पेशंट एवं उसके परिवार को भी स्वीकृत होती है ।

4

हम प्रस्तुत clinical condition का जो भी आकलन/निदान करे, आयुर्वेद या मॉडर्न परिभाषामें ; क्या उसका एक सर्वमान्य सर्वाsनुनेय चिकित्साक्रम एवं हो सके तो चिकित्साकल्प तथा उनका मात्रानिर्धारण व उपचार कालावधी यह सब सर्वसमान सर्वस्वीकार्य मतैक्य के रूप में (प्रोटोकॉल) क्यू नहीं है? और देश, काल, वंश, आहार, (प्राय:) वय, लिंग आदि के निरपेक्ष; पूरी दुनिया में एकसमान है ।


हमारे यहा केवल *एक हि व्यक्ति को ये आश्चर्यकारक यशस्विता irregularly irregular रूप में क्यू प्राप्त होती है?* सभी को क्यू नहीं? यह अपवाद क्यू है, निरपवाद नियम या सार्वत्रिक निश्चित अनुभूति एवं दृढ विश्वास क्यू नहीं?


हेतु संप्राप्ती दोष दूष्य निर्धारण (ये सब को होता भी है?!) तथा चिकित्साक्रम कल्प मात्रा कालावधी तथा अपेक्षित परिणाम इनमे विभिन्नता मतभेद का spectrum इतना विस्तृत है कि एकवाक्यता का संभावना कम से कम इस शती में तो नहीं है ।


और शास्त्र तो परादि गुणो को चिकित्साके सिद्ध्युपाय कहता है , जिसमे *निश्चित कथन* को महत्त्व दिया है ।

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वैद्य हृषीकेश म्हेत्रे 

एम डी आयुर्वेद, एम ए संस्कृत

आयुर्वेद क्लिनिक पुणे & नाशिक

12.1.2024

9422016871

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