Tuesday, 2 December 2025

हिंदी : 3 इडियट्स, इमिटेशन नक्कल कॉपी & वचाहरिद्रादि !

हिंदी अनुवाद (Hindi Translation)

​3 इडियट्स, इमिटेशन नक़ल कॉपी & वचाहरिद्रादि !

Picture credit Google Gemini AI 


​Public memory is short lived, but truth and history are forever!

रविवार के दिनभर के पुणे की ओपीडी के बाद, सोमवार को नाशिक में घर पर पूरा दिन आराम करते हुए, सहज रूप से स्मार्ट टीवी पर रिमोट घुमाया तो सामने थ्री इडियट का पोस्टर दिखा ... क्लिक किया और अनेक बार देखी हुई थ्री इडियट के पहले पच्चीस मिनट फिर से देखा ... कुछ वाक्य सबके मन में घर कर गए हैं, उन्हें सुनते-देखते हुए, कुछ नए संदर्भ उससे जोड़े गए ... इसलिए यह पोस्ट लिख रहा हूँ !!!

​वायरस के घोसले में आज़ाद पंछी घुस आया था

​दुनिया के तौर तरीकों को कदम कदम पर चैलेंज करता था

​आसान भाषा में नहीं कह सकते, थोड़ी देर पहले कोशिश की थी ...

​ये सभी को मालूम वाक्य सुनते हुए महसूस हुआ कि ...

I am an idiot

और फिर एक बार लगा कि ... I am Happy that I am an idiot

​यह पोस्ट किसी को self praise (स्वस्तुति) लग रही होगी, इसलिए अगली पोस्ट उन्होंने नहीं पढ़ी तो उन्होंने कुछ मिस कर दिया ऐसा निश्चित रूप से होगा! खैर!!

​पिछले अनेक वर्षों में आयुर्वेद के क्षेत्र की ...

अनेक रूढ़ परंपराओं, स्वीकृत सिद्धांतों, श्रद्धेय बातों को; तर्क और बुद्धि के बल पर, मैं लगातार चैलेंज करता आया हूँ!

इस वजह से अनेक लोगों की शत्रुता /+ नाराज़गी स्वीकार की!

​संहिता आप्त प्रमाण (प्रामाणिक ग्रन्थ) के विषय में कट्टर निष्ठा होते हुए भी, प्रमेह मतलब डायबिटीस नहीं... इस विधान का पता लगाते समय, प्रमेह का सामान्य लक्षण, "प्रभूत मूत्रता" (अधिक मात्रा में पेशाब होना) को मापना या निर्धारित करना संभव नहीं है, क्योंकि प्राकृत मात्रा (सामान्य मात्रा) में मूत्र कितना होता है, यही संहिता ग्रंथों में लिखा नहीं है, कि जिसकी तुलना में "प्रभूत मूत्रता" ऐसा निदान किया जा सके ...

​इसलिए "डायबिटीस" को समझने के लिए, इसके लिए "रसरक्तगत क्लेद" (रस और रक्त धातु में अत्यधिक नमी/चिपचिपापन) यह संकल्पना और केवल थियोरेटिकल संकल्पना न रखकर, "उसके लिए", "वचाहरिद्रादि" यह, "पहले कभी भी, किसी ने भी, न इस्तेमाल की हुई" औषधि, असल में पेशेंट पर पहले चूर्ण स्वरूप में, बाद में टैबलेट स्वरूप में ... और अब पिछले अनेक वर्षों से "सप्तधा बलाधान" इस संकल्पना के अनुसार टैबलेट स्वरूप में इस्तेमाल कर रहा हूँ !

​कल रविवार के दिन पुणे की ओपीडी में, एक तरुण महिला वैद्य आईं और उन्होंने बताया कि, "मुझे वचाहरिद्रादि टैबलेट चाहिए, मैं पहले भी वचाहरिद्रादि उपयोग कर रही थी पर वह वपुर्सनु या Fart Qualey फ़ार्मेसी का उपयोग कर रही थी!" 

(👆🏼इस संवाद में फार्मेसियों के मूल नाम बदल दिए गए हैं। बदले गए नाम काल्पनिक हैं। ऐसे नाम वाली फार्मेसियाँ अस्तित्व में नहीं हैं। उन नामों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। यदि वे ऐसे प्रतीत होते हैं, तो इसे एक संयोग माना जाना चाहिए।)

​यह सुनकर मुझे आनंद भी हुआ और हँसी भी आई !!!

​When we imitate, we honor the invisible effort behind the original mastery!

​उनके साथ वचाहरिद्रादि, डायबिटीस और मैं = MhetreAyurveda फ़ार्मेसी जो तैयार कर रही है, उन कल्पशेखर भूनिंबादि, वेदनाशामक दुरालभादि, स्थौल्यहर त्रिफळाअभयादि गृध्रसीनाशक यष्टी लाक्षा द्रुतविलंबितगो मुस्तादि गण ऐसी अन्य कुछ टैबलेट्स और उनके बारे में उनके शंकाओं को लेकर कुछ देर चर्चा होने के बाद, वह चली गईं।

​रविवार की अगली शाम की पूरी ओपीडी खत्म होने के बाद, देर रात बस से नाशिक वापस आते समय "आनंद और हँसी" ऐसी दोनों भावनाएँ बार-बार मन में आ रही थीं कि ...

थ्री इडियट में जिस तरह, अनेक जगह पर स्थापित विचारों से अलग विचार + अलग कृति, रैंचो करता है, व्यवहार practice में लाता है ...

वैसे अपने जीवन में हम म्हेत्रेआयुर्वेद MhetreAyurveda भी आयुर्वेद के क्षेत्र में कुछ बातों में कर पाए, इसका संतोष हुआ!

​... और वह बुद्धि, वह सामर्थ्य देने वाले, भगवान, माता-पिता और गुरुओं का और चरक, सुश्रुत, वाग्भट का ऋण, स्मरण करके मन ही मन मैंने उन्हें बार-बार नमस्कार किया 🙏🏼🙏🏼🙏🏼

​वचाहरिद्रादि यह गण (समूह) सुश्रुत में सूत्र स्थान के 38वें अध्याय में अष्टांगहृदयकार वाग्भट से भी कई सदियों पहले लिखा गया है ...

​वह गद्य में लिखा हुआ वचाहरिद्रादि गण वाग्भट ने, श्लोक में, पद्य में, दरअसल काव्य में निबद्ध किया, इसीलिए मैं वचाहरिद्रादि वाग्भट से इस्तेमाल करता हूँ, ऐसा कहता हूँ!!!

​मेरे पहले वचाहरिद्रादि, कई सदियों से अस्तित्व में था ही! पर असल में वचाहरिद्रादि गण यह एक रोग की औषधि के रूप में, एक अवस्था की औषधि के रूप में, रसरक्तगत क्लेद इस आयुर्वेदीय मूलभूत संकल्पना पर आधारित निदान की औषधि के रूप में, म्हेत्रेआयुर्वेद MHETREAYURVEDA ने पहल करने के कारण से, व्यवहार में, कई वैद्यों (डॉक्टरों) के इस्तेमाल में आया ... इसका बहुत आनंद है !!!

​वचाहरिद्रादि गण यह संहिताकारों = चरक, सुश्रुत, वाग्भट की देन है! हाँ, वचाहरिद्रादि गण चरक में भी है!!!

​... तो वह वचाहरिद्रादि गण यह मेरा पेटेंट, मेरा स्वामित्व, मेरी मालकी, मेरा संशोधन/ इन्वेंशन/ डिस्कवरी ऐसा कुछ भी नहीं है ... लेकिन सदियों से ग्रंथों में लिखा हुआ यह योग (फ़ॉर्मूला), प्रत्यक्ष व्यवहार में ... मेरे साथ = म्हेत्रेआयुर्वेद MhetreAyurveda इनके साथ ही, जिन अनेक सन्मित्र (अच्छे दोस्त) और तरुण वैद्यों ने वचाहरिद्रादि सप्तधाबलाधान इस संकल्पना के अनुसार म्हेत्रेआयुर्वेद MHETREAYURVEDA ने तैयार की हुई "लाखों" टैबलेट इस्तेमाल करके, वह केवल डायबिटीस ही नहीं बल्कि ... पीसीओडी थायरॉईड सर्दी स्थौल्य कर्णरोग शिरोरोग नेत्ररोग बालरोग त्वचारोग ऐसे कितने बड़े स्पेक्ट्रम में, जहाँ-जहाँ पृथ्वी जल क्लेद बढ़ा हुआ है, ऐसे सभी संतर्पण जन्य विकारों (over-nourishment-induced diseases) की एक बॉस BOSS औषधि इस अर्थ से "वचाहरिद्रादि" यह, अब केवल महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि, पूरे भारतभर में स्थापित हो गया है, इसका मुझे साभिमान (गर्व के साथ) आनंद है !!!

​किसी चीज़ की जब नक़ल /कॉपी /इमिटेशन होती है, तब वह चीज़ निश्चित रूप से सामर्थ्यवान पोटेंशियल वाली, सिद्ध सफलता देने वाली, ऐसी होती है, यह निश्चित है!

​"Imitation is the sincerest form of flattery that mediocrity can pay to greatness". Oscar Wilde

​पर वह इमिटेशन कॉपी नक़ल ऐसे लोगों ने करनी चाहिए कि जिन्होंने मेरे पीजी एन्ट्रन्स क्लास के पहले बैच के सिलेक्ट हुए विद्यार्थियों का उन्होंने आयोजित किये गए सार्वजनिक कार्यक्रम में कौतुक (प्रशंसा) करने से मना कर दिया था और कुछ ऐसे लोग कि जो रसशास्त्र को समर्पित हैं, रसशास्त्र जिनका जीव की प्राण है (सबसे प्रिय है) ऐसे लोग वचाहरिद्रादि यह औषधि निर्माण कर रहे हैं, इसकी हँसी भी आई और बहुत बहुत आनंद भी हुआ!!! सभी आनंद सात्विक (पवित्र) ही होने चाहिए ऐसा कुछ नहीं है, कुछ आनंद राजस और तामस (Passionate and Ignorant) ऐसे भी होते हैं और मैं कोई संत नहीं हूँ, मैं भी त्रिगुणों से बाधित ऐसा सामान्य इंसान ही हूँ और कुछ भी कभी भी न भूलने वाला इंसान हूँ!!!

​1956 से 1999 इतने लंबे काल में, भारत में पीजी एन्ट्रन्स एग्ज़ाम होती थीं, पर इस एग्ज़ाम के लिए प्रिपरेशन कोर्स = कोचिंग क्लास हो सकता है, ऐसी पायोनियर युनिक इनोव्हेटिव्ह संकल्पना (अग्रणी, अद्वितीय, नवीन संकल्पना) 1999 में म्हेत्रेआयुर्वेद MHETREAYURVEDA ने असल में लाई ... और आगे लगातार 16 वर्ष, वह संकल्पना तूफ़ान लोकप्रिय करके सफलतापूर्वक, ऑफलाईन = इन हॉल ट्रेनिंग इस प्रकार, पुणे मुंबई कोल्हापूर नाशिक, ऐसे चार शहरों में ... खुद व्यक्तिगत रूप से अकेले, 2016 तक चलाई! उसमें से साढ़े चार सौ (450+) से अधिक स्टूडेंट्स भारतभर के विविध पीजी सेंटर पर सिलेक्ट हुए!! उनका जीवन बदल गया !!! आज भारत के लगभग सभी पुराने नए आयुर्वेद कॉलेज में, म्हेत्रेआयुर्वेद MHETREAYURVEDA के स्टूडेंट, प्रोफेसर एचओडी या प्रिंसिपल ऐसे किसी न किसी सम्माननीय पद पर विराजमान हैं।

​1999 में PG CET एन्ट्रन्स क्लासेस शुरू करने के बाद, उसका इमिटेशन कॉपी नक़ल यह 2003 से अन्य कुछ जगह पर शुरू हुआ ... इसका ही मतलब म्हेत्रेआयुर्वेद MhetreAyurveda के उस PG एन्ट्रन्स क्लास कोचिंग क्लास इस संकल्पना में उतना सामर्थ्य पोटेंशियल निश्चित रूप से था!

​ठीक उसी तरह वचाहरिद्रादि यह गण हज़ार से अधिक (1000+) वर्षों से संहिताओं में लिखा हुआ है, पर उसे "असल में, व्यवहार में लाने, स्थापित करने, लोकप्रिय करने का काम" म्हेत्रेआयुर्वेद MhetreAyurveda ने किया और अब रविवार को मुझे मिलने आईं वह आयुर्वेद प्रैक्टिशनर वैद्या (डॉक्टर) को, वचाहरिद्रादि गण अन्य फ़ार्मेसी में भी उपलब्ध होता है, यह सुनने के बाद, उसका इमिटेशन हो रहा है, कॉपी हो रही है, नक़ल हो रही है, यह ध्यान में आया !!!

​निश्चित रूप से वचाहरिद्रादि गण तैयार करने वाली इन सभी आयुर्वेद की अन्य फ़ार्मेसी, अन्य किचन फ़ार्मेसी, अन्य वैद्यों को मेरी शुभकामनाएँ और अभिनंदन ... कि उन्होंने वचाहरिद्रादि यह एक अत्यंत सामर्थ्यवान अच्छी औषधि, मैं = MhetreAyurveda जहाँ तक पहुँच नहीं सकता, वहाँ तक पहुँचाने के लिए, पहल की और वचाहरिद्रादि इस अत्यंत सामर्थ्यवान औषधि का अपनी प्रोडक्ट लिस्ट में स्वीकार और समावेश किया और उसका वितरण करके अनेक वैद्यों और अनेक मरीज़ों को उसका लाभ पहुँचाया।

​ज्योत से ज्योत जगाते चलो... ज्ञान की गंगा बहाते चलो!!!

​जैसे म्हेत्रेआयुर्वेद MHETREAYURVEDA ने वचाहरिद्रादि यह गण आज के आयुर्वेद क्षेत्र के क्लिनिक क्लिनिकल प्रैक्टिस के व्यवहार में स्थापित किया, वैसे ही अन्य 22 कल्प (फ़ॉर्मूले) भी संकल्पित करके उन्हें सप्तधा बलाधान टैबलेट इस स्वरूप में वैद्यों को इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध किया है। उन्हें भी अन्य फ़ार्मेसियों को तैयार करना शुरू करना चाहिए ताकि उन कल्पों का लाभ भी, जहाँ तक म्हेत्रेआयुर्वेद MHETREAYURVEDA नहीं पहुँच सकता, ऐसे वैद्यों और पेशेंटों को हो सके!!! जिसमें कल्पशेखर भूनिंबादि, स्थौल्यहर आद्य कल्प त्रिफळाअभयादि, वेदनाशामक दुरालाभादि, वासागुडूच्यादि, गृध्रसीनाशक, द्रुतविलंबितगो, यष्टी लाक्षा ऐसे अनेक कल्पों का (इन सभी कल्पों = औषधियों = सप्तधाबलाधान टैबलेट्स की जानकारी विषयक लिंक, लेख के अंत में या कमेंट्स में दी गई हैं। अन्यथा जिन्हें ये लिंक चाहिए, उन्होंने "रेंचो rancho" ऐसा 9422016871 पर व्हाट्सअप करें) ... और विशेष रूप से "क्षीरपाक शर्करा ग्रैन्युल्स" इसमें यष्टी काश्मरी, यष्टी गुडूची, लशुन आर्द्रक, शतावरी गोक्षुर,शालिपर्णी ऐसे संहितोक्त कल्पों (शास्त्रों में वर्णित फ़ॉर्मूलों) का समावेश है।

​स्थापित विचारों को चैलेंज करना और नए विचारों की बुआई करना, इस दृष्टि से म्हेत्रेआयुर्वेद MhetreAyurveda काम करते हैं, इसीलिए जैसे ऐसी अनेक कल्पनाओं, औषधियों, सप्तधाबलाधान टैबलेट्स का सकारात्मक योगदान, उन्होंने आयुर्वेद क्षेत्र में दिया है ...

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वैसे ही ... दोष अस्तित्व में नहीं होते = शून्य दोष, रस धातु अस्तित्व में नहीं होता है, धातु छह ही होते हैं, महाभूत चार ही होते हैं, मल दो ही होते हैं, षट् क्रिया काल नहीं होते, ज्वरपंचक कषाय = धातुपाचक यह अशास्त्रीय है, मन मर्म ओज आत्मा कला इनका प्रत्यक्ष व्यवहार में काड़ीमात्र उपयोग (ज़रा भी उपयोग) नहीं होता, रसशास्त्र नाड़ी परीक्षा योग इनका आयुर्वेद से कोई भी संबंध नहीं है ... ऐसे कितने ही प्रकार से ... आयुर्वेद के तौर तरीकों को कदम कदम पर चैलेंज करना ... आयुर्वेद के घोसले में एक आज़ाद पंछी का घुस आना ... यह रैंचो से साम्य बताने वाली, इडियटपन की अनोखी विलक्षणता म्हेत्रेआयुर्वेद MHETREAYURVEDA के अंदर है, इसका आनंद और अभिमान है।

वचाहरिद्रादि गण सप्तधा बलाधान टॅबलेट : डायबेटिस टाईप टू तथा अन्य भी संतर्पणजन्य रोगों का सर्वार्थसिद्धिसाधक सर्वोत्तम औषध


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