पंचतिक्त : अस्थिसंधिरोग & त्वचारोग का सर्वोत्तम औषध: पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट & पंचतिक्त क्षीरपाक शर्करा कल्प ग्रॅन्युल्स
A. घटक
पञ्चतित्तकं = वृषनिम्बामृताव्याघ्रीपटोलम्
5 तिक्त : 1वासा 2निंब 3गुडूची 4कंटकारी 5पटोल
B. उपलब्धि
पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट और पंचतिक्त क्षीरपाक शर्करा ग्रॅन्युल्स ... जी एम पी सर्टिफाईड और एफडीए महाराष्ट्र द्वारा ॲप्रूवह्ड, यह MhetreAyurveda Pharmacy द्वारा , सभी बीएएमएस आयुर्वेद प्रॅक्टिशनर वैद्यों के पेशंट के उपयोग के लिए, केवल इसी वेबसाईट पर उपलब्ध है
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उपरोक्त वेबसाईट के अलावा MhetreAyurveda फार्मसी के कोई भी औषध कही पर भी किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर स्टॉकिस्ट या रिटेल आयुर्वेद औषध शॉप या अन्य किसी भी मेडिकल शॉप पर विक्री के लिये उपलब्ध नही है
C. उपयोगिता
निम्बामृतावृषपटोलनिदिग्धिकानां
भागान् पृथक् दश पलान् विपचेद्धटेऽपाम्।
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अष्टाङ्गहृदय वाताव्याधिचिकित्सित
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तत्सेवितं विधमति
1. प्रबलं समीरं सन्ध्यस्थिमज्जगतमप्यथ समीर = वातव्याधी
2. कुष्ठमीदृक्॥ सन्ध्यस्थिमज्जगतम् again ! कुष्ठ = त्वचारोग
अर्थात पंचतिक्त यह ...
1. संधि अस्थि मज्जागत वात व्याधी Musculoskeletal & Osteoarthrological तथा उसी प्रकार से,
2.
संधि अस्थि मज्जागत कुष्ठरोग अर्थात त्वचारोग Skin Diseases का भी उत्तम उपचार है.
D. अन्य उपयोग
3.
साथ ही "पंचतिक्त" मेध्य 🧠 तथा चक्षुष्य 👁👁 है.
4.
रक्तपित्त/वासा, वातरक्त/गुडूची & कास/कंटकारी का, तथा
5.
अवरोधजन्य, पृथ्वी जल प्रधान, द्रव गुण प्रधान, शैथिल्यजन्य, क्लेदजन्य विकारो में उत्तम औषध है
A. 1.
"तिक्त रस युक्त क्षीर घृत का बस्ति" यह, अस्थिक्षय की चिकित्सा है (अष्टाङ्गहृदय सूत्रस्थान अध्याय 11 & चरक सूत्रस्थान अध्याय 28)
2.
इसलिए *पंचतिक्त* (सप्तधा बलाधान टॅबलेट या क्षीरपाक शर्करा कल्प ग्रॅन्युल्स, के रूप में) यह
अस्थि पर काम करने हेतु,
तीनों भोजन के पूर्व = नाष्टे के पहले/ लंच के पहले/ डिनर के पहले = अपान काल में = प्राग्भक्त काल में,
क्षीर घृत के साथ देना उपयोगी होता है.
3.
क्योंकि अस्थिधरा कला & पुरीष धरा कला एकही है, जो पक्वाशय मे स्थित है
तथा
4.
"तिक्त रस सिद्ध क्षीर घृत" इनका "बस्ति" देने के लिए कहा है और यह बस्ति, पक्वाशय में कार्य करता है. तथा पक्वाशय का नियंत्रक अपान वात है और अपान वात का औषधि काल प्राग्भक्त अर्थात भोजन पूर्व है
5.
यद्यपि "तिक्त क्षीर घृत बस्ति" यह शास्त्र का आदेश है किंतु क्षीरपाक या सिद्ध घृत बनाने को लगनेवाला समय तथा इतने तिक्त रस का = कड़वे टेस्ट का औषधि दूध/घृत पीना, यह पेशेंट के लिए सुविधाजनक नहीं होता है!
6. निर्माण विधी के विकल्प
इसलिए 80 ml दूध में 5 ग्राम पंचतिक्त चूर्ण मिलाकर जो क्षीरपाक बनेगा उसका, जितना एक्स्ट्रॅक्ट क्षीर में आएगा उसका बाय वॉल्यूम फार्मास्युटिकल कॅल्क्युलेशन करके, उतना ही पंचतिक्त का एक्स्ट्रॅक्ट, एक फ्लॅट स्पून शुगर में आएगा, इस प्रकार से पंचतिक्त ग्रॅन्युल्स तथा सप्तधा बलाधान टॅबलेट बनाए हैं! ✅️ ये ग्रॅन्युल्स यदि भोजन के पहले, क्षीर घृत के साथ दिए जाएं, तो वह तिक्त क्षीर पाक का चिकित्सकीय परिणाम देते हैं
इन ग्रॅन्युल्स की मात्रा एक फ्लॅट स्पून तीनों बार भोजन से पहले ऐसे देनी हैं ... या 2 to 6 टॅबलेट्स भोजन से पहले देनी है
7. मात्रा एवं कालावधी
यदि व्याधि की तीव्रता/ क्राॅनिसिटी & रुग्ण का वय / बल यह उतने अनुकूल नहीं है या वेदना शूल pain दारूण/strong/ असह्य/ unbearable है या व्याधि का उपद्रव मूल्य nuisance अधिक है, तो ऐसी स्थिति में यही ग्रॅन्युल्स दो या तीन फ्लॅट स्पून भोजन से पहले = 3 या 6 या 9 ग्राम तक भी दे सकते हैं ...
या फिर *पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट*; 2/4/6 की मात्रा मे वेदना की तीव्रता व्याधी की chronicity और पेशंट वय बल इत्यादी की की स्थिति के अनुसार देनी चाहिए
8.
अभी जिन पेशंट में डायबिटीज की समस्या🤔⁉️ हो,वहां पर भी यह ग्रॅन्युल्स "भोजन से पहले" देने के कारण शुगर कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज नहीं बढ़ते हैं, क्योंकि "भोजन से पहले" लेने के कारण, उसके बाद जो आहार लिया जाने वाला है, उसमें अनायास ही अपने आप ही, चार-पांच निवाले/bolus पेशेंट कम ही खाता है; क्योंकि उसके भोजन का प्रारंभ ही में दो चम्मच शर्करा/ग्रॅन्युल्स खाकर की हुई होती है
या फिर ग्रॅन्युल्स की बजाय *पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट* देना उचित होता है
9. कार्यपद्धती (मोड ऑफ ॲक्शन) एक भी बस्ती दिये बिना
इस प्रकार से "पंचतिक्त ग्रॅन्युल्स का या टॅबलेट्स" का "भोजन से पहले" प्रयोग करने के कारण, यह "अपान क्षेत्र" में अर्थात प्राग्भक्त काल में , अर्थात वात का मुख्य स्थान पक्वाशय है, उस पर कार्यरत होता है... इसलिए निश्चित रूप से, मूल संदर्भ मे उल्लेखित बस्ति के समान, शीघ्र गति से, अल्पकाल में, अपेक्षित लाभदायक परिणाम प्राप्त होते हैं ... यह केवल सैद्धांतिक तात्त्विक थियोरेटिकल हाइपोथेटिकल स्टेटमेंट ना होकर... इस प्रकार से विगत 28 वर्षों की प्रैक्टिस के अनुभव का 3000+ यह निचोड़ इस विधान में समाविष्ट है!!!
... और वह भी *"आज तक एक भी पेशंट को एक बार भी तिक्त क्षीर घृत बस्ती दिये बिना*" आज तक जितने पेशंट ठीक किये, वे सभी आज भी 22/ 24 वर्षों के पश्चात भी ठीक ही है ... वेदना मुक्त है ... अपने पांवों पर चल रहे है ... दैनंदिन सारे व्यवहार कुशलता से अनायास कर रहे है और नियमित रूप से नये नये पेशंट को रेफर कर रहे है
10. विशेष और विविध उपयोगिता
... तो L5 S1 डी जनरेशन (यह observation प्रायः सभी एलएस स्पाइन LS Spine के MRI में लिखा हुआ स्टेटमेंट होता है),
या उसके साथ L4 L3 L2 L1 Degeneration, डिस्क बल्ज, डिस्क डेसिकेशन, लिस्थेसिस, स्पॉन्डिलाॅसिस/ स्पॉन्डिलायटिस, स्लिप डिस्क, AVN, Sacro Ilitis, ओस्टियोआर्थरायटिस, knee डिजनरेशन, ACL पीसीएल लिगामेंट टेयर, सर्वाइकल स्पॉन्डलोसिस, फ्रोजन शोल्डर, अवबाहुक, विश्वाची ऐसे अनेक वातव्याधि...
जिसमें संधि अस्थि मज्जा Musculoskeletal OsteArthrological इनकी विकृति होती है ...
11.
इन सभी में "पंचतिक्त ग्रॅन्युल्स" स्वयं मधुर स्निग्ध रोपण संधान होने के कारण तथा "पंचतिक्त टॅबलेट्स" *सप्तधा बलाधान विधि* से निर्मित होने के कारण आत्यंतिक वीर्यवान होने के कारण, शीघ्र गति से अल्पकाल मे अत्यंत अपेक्षित लाभदायक परिणाम देने वाली होती है
12. कालावधी Duration
& पेशंट का वय और विकृती की कालमर्यादा chronicity के अनुसार प्रायः 6 से 12 हप्तों में = 42 से 90 दिनों में, उपरोक्त सभी प्रकार की अस्थी संधी स्पाईन जॉईंट बोन रिलेटेड विकृतियां पूर्ण रूप से ठीक करने में सक्षम होती है!!!
13. Height Growth
इसी कारण से "पंचतिक्त ग्रॅन्युल्स तथा पंचतिक्त टॅबलेट"; उचित तरुण वय मे प्युबर्टी के पश्चात; स्त्रियों में 18 वर्ष तक & पुरुषो मे 21 वर्ष तक, नैसर्गिक रूप मे हाईट बढाने के लिए भी उपयोगी होते है... जिनका प्रयोग 3 महिने से लेके 1 वर्ष तक निरंतर रूप से करना चाहिए!
14. केश पतन = बालों का झडना गिरना तथा दारूणक/रूसी = डँड्रफ मे भी अस्थि और त्वचा दोनों का संबंध होने के कारण पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट & पंचतिक्त क्षीरपाक कल्प ग्रॅन्युल्स इनका लाभदायक परिणाम प्राप्त होता है
इसके साथ *यष्टी लाक्षा टॅबलेट & यष्टी गुडूची ग्रॅन्युल्स* या केवल *गुडूची ग्रॅन्युल्स* इनका प्रयोग लाभदायक परिणाम अल्पकाल में देता है.
B. 1.
साथ ही अन्य एक वस्तुस्थिती, जो अधिक गंभीर है की... तिक्त रस यह "आकाश महाभूत" निर्माण करने वाला एक मात्र रस है, इसीलिए अस्थिक्षय जैसे वात वृद्धि की स्थिति में भी, तिक्त रस जैसा वातवर्धक ही रस, अस्थिक्षय की चिकित्सा में विशेष रूप से निर्देशित है, ऐसा अरुण दत्त की टीका में स्पष्ट रूप से लिखा है, तो यदि अस्थियों में खरत्व के लिए, सच्छिद्रता के लिए, तिक्त रस, जो आकाश और वायु महाभूतों से बना है, यह चिकित्सकीय परिणाम देता है, तो इसी प्रकार से, ...
जहां पर अवरोध है, स्पेशली हृदय की वाहिनींयों में, कार्डियक आर्टिरीज में, जो मुख्य तीन व्हेसल है... उनमें जब प्लेक plaque या थ्रोंबस के रूप में अवरोध होता है, तो वहां पर भी, "पंचतिक्त टॅबलेट्स सप्तधा बलाधान विधि से निर्मित या पंचतिक्त ग्रॅन्युल्स" इनका लाभदायक परिणाम होता है ! आत्ययिक गंभीर अवस्था छोडकर!!!
2. अवरोधनाशन = ब्लॉकेज क्लियरन्स
इसी प्रकार से जहां-जहां "पृथ्वी जल" प्रधान "स्थूल" गुण से "अवरोध" है, वहां-वहां "वायु आकाश" प्रधान "सूक्ष्म" गुण प्रधान "विवरण अर्थात स्रोतस् का विकसन = अवरोधनाशन = ब्लॉकेज क्लिअरिंग... इस दृष्टि से पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट & पंचतिक्त ग्रॅन्युल्स यह उपयोगी होते हैं
इसीलिए एव्हीएन AVN मे भी "पंचतिक्त टॅबलेट या ग्रॅन्युल्स" का उपयोग लाभदायक परिणाम देता है
3. AVN में उपचार कालावधी & नॉन रिकरन्स
किंतु, इसके लिये संयम और प्रतीक्षा की आवश्यकता होती है! साधारणतः एव्हीएन AVN के GRADE ग्रेड के अनुसार 100 से 1000 दिन तक ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है ... किंतु, तत्पश्चात इस के जो परिणाम प्राप्त होते है और जो उपशम प्राप्त होता है, वो प्रदीर्घकालीन तथा स्थायी होता है... अपुनर्भव के रूप मे नॉन रीकरन्स के रूप मे पेशंट को इस उपचार का लाभ होता है ! एव्हीएन AVN के जो पेशंट आज से 20/22 साल पहले ट्रीट और ठीक है, वे आज भी ठीक है, वेदना मुक्त है, अपने पांव पर चलते फिरते है, दौडते कूदते है और कुशलता से दैनंदिन सारे व्यवहार करते रहते है
4.
ऐसे 22 वर्ष पहले जो पेशंट एव्हीएन AVN के ट्रीट किये , वे आज भी बिना सर्जरी के, किसी भी अन्य समस्या या उपद्रव के, अपने पांवो पर चल फिर दौड रहे है और दैनंदिन व्यवहार व्यवहार पूर्ण क्षमता से कर पा रहे है
D. 1 पंचतिक्त & यकृत उष्णता तथा पित्त रक्त अग्नि +++
स्वयं "पंचतिक्त" में "वासा गुडूची निंब" यह द्रव्य होने के कारण, जैसे "वासागुडूच्यादि" यह "यकृत उष्णता" की स्थिति में "पित्त रक्त अग्नि उष्णता+++" की स्थिति में बहुतर उपयोगी होता है ... वैसे ही "पंचतिक्त" ऐसी अवस्था में उपयोगी होता है
2.
साथ ही "वासा गुडूची पटोल" यह द्रव्य "पंचतिक्त" में होने के कारण, जैसे "भूनिंबादि" यह अम्लपित्त शीतपित्त के "पृथ्वी जल" प्रधान "द्रव क्लेद"प्रधान व्याधि की ट्रॅक से संबंधित अनेक व्याधि तथा ॲलर्जी संबंधित व्याधियों में उपयोगी होता है... "क्लेद की कोष्ठ शाखा गति जन्य विकारों" में उपयोगी होता है ... वैसे ही "पंचतिक्त", भूनिंबादि के तुलना में अभाव में, प्रतिनिधि के रूप में, दुय्यम रूप से, गौण रूप में उपयोगी होता है
3.
"पृथ्वी जल प्रधान, स्थूल गुण युक्त, अवरोध" को नष्ट करने के लिए, "आकाश वायु प्रधान, सूक्ष्म गुण युक्त, तिक्त रस" का उपयोग होता है ... यह मूल सिद्धांत अगर ध्यान में लिया जाए तो आगे लिखे हुए भी , सभी व्याधियों में "पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट्स और पंचतिक्त ग्रॅन्युल्स" का युक्तियुक्त उपयोग लाभदायक अपेक्षित चिकित्सकीय परिणाम यशस्वी रूप से देता है
नाडीव्रण अर्बुद भगन्दर गण्डमाला
जत्रूर्ध्वसर्वगद गुल्म गुदोत्थ मेहान्।
यक्ष्मा अरुचि श्वसन पीनस कास शोफ
हृत्पाण्डुरोग मद विद्रधि वातरक्तम्॥
possible nearby medical conditions
Nāḍī-vraṇa — sinus/tract ulcer or wound
Arbuda — tumour / mass
Bhagandara — fistula
Gaṇḍamālā — glandular swelling of the neck or mumps
Jatrūrdhva-sarvagada — all diseases occurring above the clavicular region i.e. head, ear, nose, throat, mouth & eye
Gulma — abdominal mass / lump
Gudottha — piles, haemorrhoids & diseases arising from the anus
Meha — urinary disorders
Yakṣmā — wasting disease / tuberculosis
Aruci — anorexia / loss of appetite
Śvasana — dyspnoea / difficulty in breathing
Pīnasa — nasal disorder / rhinitis
Kāsa — cough
Śopha — swelling / oedema
Hṛt — cardiac/heart disorder
Pāṇḍuroga — pallor / anaemia-like disorder
Mada — intoxication / state of intoxication
Vidradhi — abscess
Vātarakta — gout-like disorder / gout
E. 1.
क्षीरपाक बहुत ही प्रभाव शाली परिणामकारक औषधी कल्पना है.
2. विशेष उपयोगिता & कालावधी & सहयोगी अन्य औषध
तिक्त क्षीरपाक से कई अस्थिक्षय के पेशंट [जैसे कि एल5एस1 (L5-S1) डीजनरेशन स्लिप डिस्क डिस्क बल्ज AVN सायटिका स्पाॅण्डिलाॅसिस knee degeneration ACL osteoarthritis] में लाभ होता हुआ, सभी ने अनुभव किया होता है. यह लाभ, *बस्ति दिये बिना हि*, मात्र एक मंडल अर्थात 42 दिन अर्थात 6 सप्ताह मे ही प्राप्त होता है. यदि पंचतिक्त टॅबलेट्स/ग्रॅन्युल्स का ... केवल प्लेन गुडूची/ यष्टी गुडुची / यष्टी लाक्षा इन का टॅबलेट्स या ग्रॅन्युल्स के रूप में और क्षीर घृत के साथ, भोजन पूर्व अर्थात प्राग्भक्त अर्थात अपान काल में प्रयोग किया जाए , तो अल्पकाल मे शीघ्रगती से उत्तम लाभदायक परिणाम प्राप्त होता है.
3.
क्योंकि तिक्त क्षीर बस्ति, जो शास्त्र में देने के लिए कहा है वह पक्वाशय में ही कार्यकारी होता है ... पक्वाशय का स्वामी अपान वायु है और अपान का औषधि काल प्राग्भक्त अर्थात भोजन पूर्व है इसलिए भोजन पूर्व प्राभक्त काल में दिया हुआ "पंचतिक्त + यष्टी लाक्षा / गुडुची / यष्टी गुडूची यह औषधि योग सप्तधा बलाधान टॅबलेट्स या ग्रॅन्युल्स के रूप में" ; इस प्रकार के उत्तम परिणाम अपुनर्भव कारक चिकित्सकीय लाभ के रूप में देता है, ऐसा 3000+ पेशंट का विगत 28 वर्षों के चिकित्सा व्यवसाय का अनुभव है
4.
यष्टी गुडूची क्षीरपाक या पंचतिक्त क्षीरपाक से ऐसे शीघ्र परिणाम प्राप्त हो सकते है, ऐसा पिछले 28 वर्षों का अनुभव है और ये परिणाम no recurrence अर्थात अपुनर्भव , इस प्रकार के होते है. अर्थात् पिछले 28 सालो मे ऐसे 3000+ से ज्यादा केसेस का अनुभव है, जिन मे से कईयों की सर्जिकल ऑपरेशन टल चुके है और जो पेशंट 20/22 साल पहले ठीक हुये है, वो आज भी वैसे हि ठीक है और आज भी वे पेशंट, अन्य दूसरे नये पेशंट को निरंतर रेफर करते रहते है.
5.
जो पेशंट बेड पर पडे हुए है , जिनका एस एल आर SLR, 10° से कम या शून्य 0° के समीप है, जिनका अपान क्षेत्र का व्यवहार (शौच और मूत्र) बेड पर हि, अन्य व्यक्तियों के सहाय्यता से चल रहा है, वे भी बयालीस (42) दिन या ज्यादा से ज्यादा चौरासी (84) दिन मे (6 to 12 weeks), अपने पांव पर चलकर, एक दो मंजिला स्टेप चढकर उतर कर आते है ... और अपने दैनंदिन सारे व्यवहार सुकरता से पूर्ववत करने लगते है. ऐसे अनेकों पेशंट के अनुभव हमारे पास कई वर्षों से आ रहे है.
6. Gynaecological Obstetrics Conditions
इतना हि नही, अत्यंत दुष्कर अवस्था मे भी पंचतिक्त टॅबलेट या पंचतिक्त/ गुडूची /यष्टी गुडूची क्षीरपाक ग्रॅन्युल्स अत्यंत सुखकारक यशस्वी काम करता है.
Placental insufficiency जैसी गर्भाशयांतर्गत स्थिती में भी क्षीरपाक ग्रॅन्युल्स जैसे मृदु किंतु वीर्यवान कल्पना से शीघ्र ट्रीट करके अपेक्षित अनुकूल परिणाम प्राप्त होते है, क्योंकि गर्भिणी यह मृदू औषध से ट्रीट करना आवश्यक है, ऐसे शास्त्र कहता है.
निम्नलिखित फेसबुक लिंक पर देखे , इसके बीटी एटी रिपोर्ट (BT & AT Reports) या प्लेसेंटल इन्सफिशियन्सी (Placental insufficiency) ऐसा फेसबुक सर्च करके posts में MhetreAyurved की पोस्ट देखे
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=pfbid0iTj1xCY85Qr2xXnSoTiVywSaArPCxDB9EMiY9RLaJY66Amv2AT1JuLHzuax4272Zl&id=100002080068773&mibextid=lOuIew
7. नॉन हीलिंग और डीलेड फ्रॅक्चर्स non healing & delayed fractures
भग्न मे भी *पंचतिक्त* टॅबलेट या ग्रॅन्युल्स... यष्टी लाक्षा टॅबलेट या लशुन ग्रॅन्युल्स या केवल गुडूची ग्रॅन्युल्स या यष्टी गुडूची ग्रॅन्युल्स के साथ बहुत परिणामदायक होता है & ये सभी "यथा अवस्था" अत्यंत लाभदायक सिद्ध होते है ... नॉन हीलिंग फ्रॅक्चर्स या स्पाईन के घुटने के हिप जॉइंट के सर्वाइकल लंबार के डी जनरेटिव्ह कंडिशन्स मे
8.
किंतु जैसे पहले कहा, ऐसे क्षीरपाक बनाते समय, उचित मात्रा मे, क्षीर का शेष रहकर, अचूक समय पर हि, अग्नि देना बंद करके, पूरा पानी उड जाये व केवल औषधी द्रव्य के एक्स्ट्रॅक्ट वाला दूध हि पूर्णतः शेष रहे, यह एक कलात्मक, टेक्निकल तथा समय व्ययकारक विधी है.
9.
इसलिये "क्षीरपाक" इस अमृततुल्य औषधी कल्पना के लाभ तो प्राप्त हो , किंतु उसके लिए जो दुष्कर विधी है और उसमे स्टॅबिलिटी shelf life (very short expiry time), तीक्त होने के कारण पॅलेटेबिलिटी & storage facility & ट्रान्सपोर्टेबिलिटी नही है; इन दोषों को एलिमिनेट करते हुए, एक नये विचार के साथ यह "क्षीरपाक शर्करा ग्रॅन्युल्स & सप्तधा बलाधाम टॅबलेट" प्रस्तुत कर रहे है, कि जिस प्रमाण मे औषधी का एक्स्ट्रॅक्ट क्षीरपाक मे 80 दुग्ध मे आता है, उतने ही प्लेन / सामान्य दूध मे, अगर जिस द्रव्य का क्षीरपाक बनाना है, उसका शर्करा कल्प (जैसे शतावरी कल्प बनता है, वैसे) उचित मात्रा मे (ग्राम या व्हॉल्युम की यथायोग्य proportionate परिमाण मे) मिला दिया जाये, तो उतने हि द्रव्य का एक्स्ट्रॅक्ट दुग्ध मे आयेगा, इसकी व्यवस्था कर सकते है... या 250mg की 6 सप्तधा बलाधान टॅबलेट 80ml गरम पाणी या गरम दूध मे मिलाई जाये, तो उतनाही औषधी परिणाम प्राप्त हो सके
10.
यह एक फार्मास्युटिकल कॅल्क्युलेशन है, जिसमे क्षीरपाक से (1:16:16 या 1:8:32 दोनो विकल्पों से करके) कितना औषधी एक्स्ट्रॅक्ट आता है, उसी हिसाब से उसी प्रपोर्शन से, द्रव्य : पानी : शर्करा की मात्रा का उचित गणन/ संगणन / कॉम्प्युटेशन/ कॅल्क्युलेशन /गणित करके, यह निर्धारित किया गया है ; कि 80ml या 100ml (2 पल) दुग्ध मे अगर 5 ग्राम या 6.25gms (½ कर्ष) का औषधी कल्प, शर्करा कल्प granules या क्यूब के रूप मे उसे मिला दिया जाये, तो उतनी ही क्षीरपाक की प्राप्ती, औषधी वीर्य के साथ, हो जायेगी.
11.
आज इस प्रकार से
लशुन (for bones joints spine),
रसोन आर्द्रक(For RA, Sinusitis, Rhinitis & URTI),
दूर्वा(For bleeding & heat),
कूष्मांड(for chest, bladder urine, brain),
शालिपर्णी(exclusivelyfor HEART),
गुडूची(for AVN, DVT, bones, joints, Vericose vein),
गुडूची यष्टी(for non healing delayed fractures, intellectual health, medhya, bones, hair),
शतावरी गोक्षुर(for hematuria urine bladder),
यष्टी सारिवा(for cancer, stress, heavy bleeding, heat),
& पंचतिक्त इनके pharmaceutical प्रपोर्शन के साथ शर्कराकल्प granules & सप्तधा बलाधान टॅबलेट MhetreAyurveda Pharmacy ने एफडीए ॲप्रूवह्ड और जीएमपी सर्टिफाइड गुणवत्ताके औषध, सभी बीएमएस आयुर्वेदिक प्रॅक्टिशनर वैद्यों के उपयोग के लिए उपलब्ध किये है.👇🏼
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12.
ये कोई, फिर से, मेरी इन्वेंशन डिस्कवरी रिसर्च पेटंट नही है. इन शर्करा कल्पोंका तथा सभी सप्तधा बलाधान टॅबलेट्स का भी महाराष्ट्र एफडीए FDA में म्हेत्रेआयुर्वेद MhetreAyurveda द्वारा रजिस्ट्रेशन किया हुआ है. आप भी इस प्रकार से, उचित मात्रा मे, संगणन करके computation करके, लिए हुये, उचित मात्रा मे शर्करा कल्प & सप्तधा बलाधान टॅबलेट्स काका निर्माण कर सकते है. पानी मे विद्राव्य वॉटर सोल्युबल वनस्पती एक्स्ट्रॅक्ट का स्थानांतरण/ ट्रान्सफॉर्मशन या ट्रान्सपोर्टेशन "शर्करा पर" करके, उसको ग्रॅन्युलस के रूप मे , अगर तैयार किया जाये , तो वह आसानी से कोष्ण दुग्ध मे विलयन होकर, हमे शीघ्र क्षीरपाक / इन्स्टंट क्षीरपाक प्राप्त हो सकता है, जिससे की पेशंट को ये सुविधा जनक हो और वैद्य के लिए ये ट्रान्सपोर्टेबल भी हो और इसके साथ ही या सारा समय बचाने वाला तथा इकॉनोमिकल भी है और सर्वतो मुख्य अपेक्षित परिणामकारक लाभदायक भी है!
13.
अस्थिक्षयजन्य विकृतियों में, पंचतिक्त सप्तधा बलाढान टॅबलेट तथा कल्प = क्षीरपाक शर्करा ग्रॅन्युल्स, गुडूची कल्प और गुडूची यष्टी कल्प यह तीनो कल्प "तिक्तक्षीरपाक" के रूप मे, यष्टी लाक्षा* टॅबलेट के साथ उपयोगी है.
तिक्तक्षीरपाक अस्थिक्षय मे उल्लेखित है, साथ हि अगर हम भग्न अधिकार देखेंगे, तो मधुर औषधसिद्धं *लाक्षा युतम्*, इस तरह से संदर्भ आता है. इसलिये यष्टी के साथ गुडूची को यहां पर समाविष्ट किया है, जिससे की मधुर और तिक्त दोनो रसों का क्षीरपाक यहां पर प्राप्त हो सके.
14. पंचतिक्त + यष्टी लाक्षा + यष्टी गुडूची इनके विशेष इंडिकेशन्स उपयोगिता
और भी अगर आगे जाना है, तो *पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट्स या शर्करा कल्प = ग्रॅन्युल्स* अधिक उपयोगी होते है. मन्या कटी जानु शूल, तथा अस्थिक्षयात्मक संप्राप्ति के ए सी एल ACL, एव्हीएन, ऑस्टिओ आर्थ्राइटिस, सायटिका, एल फाईव्ह एस वन डीजनरेशन L5-S1, लंबर &/or सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस... इन सभी मे पंचतिक्त + केवल प्लेन गुडूची + यष्टी गुडूची इन तीनों में से कोई भी एक क्षीरपाक ग्रॅन्युल्स = शर्कराकल्प; *यष्टी लाक्षा* टॅबलेट के साथ अपेक्षित परिणाम देता है. पंचतिक्त जैसे ही परिणाम लशुन ग्रॅन्युल्स से आते है , जो "भग्नसंधानकर है और प्रभंजनं जयति लशुनः" इस रूप मे वात का सर्वोत्तम औषध है
15.
पंचतिक्त का उपयोग अस्थिभग्न के साथ साथ, त्वचारोगों मे भी कार्यकारी है! यह शर्करा कल्प ग्रॅन्युल्स या सप्तधा बलाधान टॅबलेट नाम की अभिनव कल्पना अगर दुग्ध के साथ या गरम पानी के साथ दी जाये, तो किसी भी औषध को बालक के लिए लेना सुग्राह्य होगा. यह शर्करा कल्प होने के कारण, जैसे दुग्ध या पानी के साथ दे सकते है, वैसे हि इस पंचतिक्त शर्कराकल्प भेषज को चाय कॉफी के साथ तथा रोटी पर पंचतिक्त ग्रॅन्यूल्स फैला कर तथा पंचतिक्त टॅबलेट्स को पीस कर उसका चूर्ण पावडर बनाकर वह रोटी पर फैला कर, घी लगाकर रोल बनाकर भी दे सकते है. तो इसकी "*बहुकल्पना* बहुगुणता संपन्नता और योग्यता", इसके साथ साथ हि इकॉनाॅमिकली अफोर्डेबल है.
16.
त्वचारोगों के सभी प्रस्तुतीकरण= मॅनिफेस्टेशन्स में पंचतिक्त सप्तधा बलाधाम टॅबलेट या पंचतिक्त क्षीरपाक शर्करा कल्प ग्रॅन्युल्स उपयोगी होते है ...
विशेष रूप से ...
जहां, कफ पित्त प्रधान, पृथ्वी जल प्रधान, द्रव क्लेद प्रधान, स्राव कंडू दुर्गंध दाह रक्तिमा लालिमा वैवर्ण्य गौरव शोथ संवेदनहीनता सुप्ति बाधिर्य ऐसे लक्षण हो... वहा पर टॅबलेट या क्षीरपाक शर्करा कल्प ग्रॅन्युल्स का प्रयोग *उष्ण जल या मुद्गयूष* के साथ करे!
और ...
जहां पर, रूक्ष कंडू दाह त्वचा का टूटना स्केलिंग शोथ वेदना अत्यधिक दाह रक्तस्राव ऐसे लक्षण हो ... वहा पर क्षीर घृत के साथ या तो पंचतिक्त शर्करा कल्प ग्रॅन्युल्स या पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट का प्रयोग करना लाभदायक परिणाम देता है
17. मात्रा, अनुपान & कालावधी त्वचारोग के लिए
विशेषतः पंचतिक्त टॅबलेट जो सप्तधा बलाधान विधी से बनाई जाती है, जिसमे 7 गुना सामर्थ्य है, यह कुष्ठरोग अर्थात त्वचारोग के लिए, भोजन पश्चात्, तीनो बार अर्थात नाश्ते के बाद/ लंच के बाद/ डिनर के बाद; गरम पानी या मुद्गयूष के साथ (या शुष्क रूक्ष कुष्ठ हो तो अच्छे गुणवत्ता के, शुद्ध गृहनिर्मित देसी घी के साथ )देना अत्यंत लाभदायक होता है.
त्वचारोग की व्याप्ती तथा क्रोनिसिटी की अनुसार 6 हप्ते अर्थात 42 दिन या 12 हप्ते अर्थात 90 दिन मे त्वचारोग = कुष्ठरोग मे उत्तम उपशम प्राप्त होता है
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वैसे भी आरोग्यवर्धिनी का जो भी कार्मुकत्व है, वह "निंबपत्र की भावना" तथा त्रिफला और कटुकी इनका विरेचनत्व इनके कारण ही है और पंचतिक्त में निंब का समावेश है ही!
19. Dose & Duration
पेशंट मे कुष्ठ की त्वचारोग की व्याप्ती देखकर तथा लक्षणों की तीव्रता देखकर, पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट 6 गोली 3 बार / या 4 गोली 3 बार / या 2 गोली 3 बार ऐसा प्रयोग करना उचित होता है.
डोस कितना देना है, यह वैद्य ने, पेशंट का असेसमेंट करके, निश्चय करना चाहिये
20. बाह्य प्रयोग से लाभ External Application Usage
साथ मे पंचतिक्त का ही या TNKMJ का चूर्ण का लेपन, यदि मसूर दाल के आटे के साथ मिलाकर, पूरे शरीर पर करके , वह लेप सूखने पर, गरम पानी से स्नान किया जाये और उसके पश्चात त्वचा सुती(cotton) कपडे से पोछकर, शुष्क होने के बाद, उस पर एलादि केर तैलम या शतधौत घृत ... या रक्तस्राव या अन्य कोई स्राव हो तो जात्यादि घृत/तैल लगाना, यह बाह्य उपचार के रूप मे लाभदायक होता है , कुछ मर्यादा तक!
21. External Don'ts
इस पूरे उपचार कालावधी (= 6 months) मे, शरीर पर साबुन शाम्पू फेसवॉश इस प्रकार के झाग foam होने वाले कोई भी केमिकल कॉस्मेटिक्स इन का प्रयोग नही करना चाहिए
Food Don'ts
तथा भोजन मे अम्लरस, लवण रस, मैदा जन्य पदार्थ, हरी पत्तेदार सब्जीया (पत्र शाक), जमीन के नीचे उगने वाले पदार्थ & कुकर मे पकाये हुए पदार्थ ... इनका सेवन पूर्णतः वर्ज्य करना चाहिये, जितने दिन उपचार चल रहे है, उससे द्विगुण दिनों तक!!!
22 महाभूत विचार
तिक्त रस यह एकमात्र आकाश महाभूत युक्त रस है और आकाश महाभूत सत्त्व बहुल है, सत्त्व लघु प्रकाशक होता है ... साथ ही मेध्य होने के कारण तमो गुण प्रधान अर्थात पृथ्वी जल प्रधान अर्थात क्लेद प्रधान विकारो में यह उपयोगी होता है
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तिक्त रस के दो सर्वश्रेष्ठ द्रव्य अर्थात गुडूची और पटोल यह दोनों भी पंचतिक्त में समाविष्ट है, इसमे से गुडूची तो मेध्य रसायन भी है
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शार्ङ्गधर संहिता मे पंचतिक्त का उल्लेख विषमज्वर के संदर्भ मे आता है और ज्वर की संहितोक्त चिकित्सा सूत्र मे तिक्त रस का स्पष्ट स्वतंत्र मुख्य उपचार के रूप मे उल्लेख हुआ है
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वासा (रक्तपित्त का), गुडूची (वातरक्त का) और कंटकारी (कास का) अग्र्य द्रव्य, है ऐसे तीन 3 अग्र्य द्रव्य का समावेश भी पंचतिक्त में है
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पटोल हृद्य & कृमिनाशक है. तथा पटोल यह अम्लपित्त & शीतपित्त का प्रमुख शोधनद्रव्य है, योगरत्नाकरोक्त चिकित्सा में! अर्थात यह शाखा कोष्ठ गत क्लेद जल पृथ्वी प्रधान द्रव शैथिल्य प्रधान विकारो मे उपयोगी होता है!
27.
पंचतिक्त सप्तधा बलाधान टॅबलेट और पंचतिक्त क्षीरपाक शर्करा ग्रॅन्युल्स ... जी एम पी सर्टिफाईड और एफडीए महाराष्ट्र द्वारा ॲप्रूवह्ड, यह MhetreAyurveda Pharmacy द्वारा , सभी बीएएमएस आयुर्वेद प्रॅक्टिशनर वैद्यों के पेशंट के उपयोग के लिए, केवल इसी वेबसाईट पर उपलब्ध है 👇🏼
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