Friday, 27 March 2026

विद्धकर्म 📌📍 & मर्म चिकित्सा(?) का वास्तव! ॲक्युपंक्चर & सिद्ध के वर्म चिकित्सा की, की गई बौद्धिक चोरी = इंटेलेक्च्युअल रॉबरी

विद्धकर्म 📍📌 & मर्म चिकित्सा(?) का वास्तव! ॲक्युपंक्चर & सिद्ध के वर्म चिकित्सा की, की गई बौद्धिक चोरी = इंटेलेक्च्युअल रॉबरी




सभी पेशंट तथा आयुर्वेद के हितचिंतक विद्यार्थी एवं नवतरुण वैद्यों के हित में प्रसृत / प्रस्तुत !!!


सुश्रुतोक्त अष्टविध शस्त्र कर्म मे "व्यध या वेधन" ऐसे शब्द है ... किंतु ये सिरा वेधके संदर्भ में अर्थात रक्तमोक्षण का एक प्रकार इस रूप मे है. किंतु सिराव्यध छोडकर, अन्य कही पर भी विद्ध शब्द उपचार के रूप मे उल्लेखित नही है. विद्ध शब्द मर्म स्रोतस कर्ण दृष्टि रोग मे कुछ प्रक्रिया के संदर्भ मे आया है. 


किंतु आज जिस प्रकार से लोकप्रियता & भीड/crowd के आधार पर एक फेक नॅरेटिव्ह बनाया जा रहा है और उसके लिए शीर्ष आयुर्वेद संस्थान से लेकर सामान्य स्तर के सेमिनार या कॉलेज तक में होने वाले प्रस्तुतीकरण यहां तक, सभी जगह, लोग इसके पीछे पागल होते हुए दौड रहे है! यह आश्चर्य की किंतु दुर्दैव की बात है !


वस्तुतः आज जिसे आयुर्वेद क्षेत्र में विद्ध कर्म नाम से लोकप्रियता और भीड जमा करने का साधन माना जाता है ... वह वस्तुतः, बौद्धिक स्तर पर की गई, एक चोरी डकैती लूट है! ॲक्युपंक्चर नाम का जो कोई अन्य एक शास्त्र है, उसको केवल BAMS डिग्रीधारक कर रहे है, इसलिये उसको यहां का नाम देकर आयुर्वेद में विद्ध कर्म इस प्रकार से, गोबेल्स थिअरी के द्वारा , बार बार झूठ बोल कर प्रस्थापित किया गया है.


यह सत्य हो सकता है की विद्ध कर्म नाम से आज आयुर्वेद के क्षेत्र में, जो किया जाता है, उसके रिजल्ट अच्छे है ... किंतु रिझल्ट है और BAMS की डिग्री है वो लोग इसे करते है; इसका अर्थ वह विद्धकर्म, जो ॲक्युपंक्चर शास्त्र को चुरा कर , लूट कर , डकैती करके = "इंटेलेक्च्युअल रॉबरी" करके, यहां घसीट कर लाया गया है ... वह आयुर्वेद नही है!


मुझे किसी की लोकप्रियता या भीड जमा करने का कौशल्य इस पर कोई आपत्ती नही है 


किंतु वह करते समय, *"आयुर्वेद शास्त्र के नाम पर"* , किसी अन्य शास्त्र की बौद्धिक चोरी = इंटेलेक्च्युअल रॉबरी करके, उसका अनैतिक नाॅन एथिकल नॉन मॉरल रूप मे, दिनदहाडे, पेशंट पर धडल्ले से उपयोग किये जा रहे है ... यह अत्यंत अनुचित निषेधार्ह निंद्य गर्हणीय त्याज्य वर्ज्य इस प्रकार की यह वृत्ती है !


मेरा किसी व्यक्ति को कोई विरोध नही है ...


किंतु आयुर्वेद शास्त्र मे जो कभी था ही नही , ऐसी पर शास्त्र की विधि को, *"आयुर्वेद के नाम पर" ... "बेचना"* इस वृत्ती का मैं आत्यंतिक विरोधी हूँ. 


इस प्रकार की "इंटेलेक्च्युअल रॉबरी" करना, यह मेरी दृष्टी से एक पाखंड है और जो पेशंट हमारा अन्नदाता है उसका यह एक्स्प्लाॅयटेशन है, दिशाभूल है ... तो ऐसी अनैतिक अनएथिकल चीजे नही करनी चाहिए ... और अगर कोई कर रहा है तो उसको सक्षम अधिकारी/ सक्षम संस्था/ Regulatory Authority ने , उस पर पाबंदी/रोक/BAN लगाना चाहिये ...


किंतु ऐसा न होते हुए लोकप्रियता और भीड का दबाव इस कारण से, आयुर्वेद क्षेत्र के शीर्ष संस्थान & उनके अनुभवी और ज्येष्ठ प्रमुख, इस विद्धकर्म को सर पर लेकर नाच रहे है ... ये देखते हुए हमारी शास्त्र के प्रति "निष्ठा" और शास्त्र की दृष्टी से "सोचना", इसमे हम पूर्णतः असफल हुए है और हमे शास्त्र से कुछ भी लेना देना नही है... शास्त्र के लिए हमे कुछ भी "सोचना" नही है ! ... हमे , "जैसे भी हो सके" , आयुर्वेद के नाम पर, "पैसा बनाने वाली" हर "चीज" को *"बेचना"* है! 


मै इस "बेचने" वाली , "धंदा" करने की "स्वार्थी" वृत्ती का अत्यंत तीव्र शब्द मे निषेध करता हूँ. 


और अन्य शास्त्र के कौशल्य को या विधियों को, आयुर्वेद के नाम पर "बेचना" यह वृत्ती, केवल इस विद्ध कर्म के बारेमे ही नही है ... अपितु, यह वृत्ती ; योग रसशास्त्र नाडी इन लोकप्रिय चीजों के बारे मे भी है ... की जिनका आयुर्वेद की मूल संहिताओ से, तत्त्वों से, नैदानिक परीक्षण विधियों से, भैषज्य कल्पना के सिद्धांतों से ... दूर दूर तक ... कोई भी संबंध नही है!


एक मर्मचिकित्सा नाम से भी एक थेरेपी आयुर्वेद क्षेत्र में "आयुर्वेद के नाम पर" चलाई जाती है ... लेकिन वो ॲक्च्युली "सिद्ध" इस आयुष् अंगके "वर्म" चिकित्सा यहा से प्रेरित है ! आयुर्वेद में मर्म संख्या केवल 107 है! इस सिद्ध पद्धती में "वर्म" संख्या 108 है ... या विविध संदर्भों को अनुसार सिद्ध पद्धती में वर्म संख्या (मर्म नही) 251, 500 या 8000 ऐसी आयुर्वेदोक्त मर्मों से अधिक है. 


इन वर्मों का वर्गीकरण भी सिद्ध पद्धती में, आयुर्वेद मर्म वर्गीकरण से बहुत ही अलग है!


आयुर्वेद मे मर्म यह केवल निदान के लिए उल्लेखित है! मर्म का चिकित्सा के रूप मे कोई भी उपयोग कही पर भी आयुर्वेद शास्त्र मे उल्लेखित है ही नही. 


सिद्धनामक अन्यचिकित्सा पद्धती से फिरसे इंटेलेक्च्युअल रॉबरी = बौद्धिक चोरी करके ये मर्म चिकित्सा नाम से चीजे चलाई जाती है. ये इसी प्रकार से एक अन् एथिकल नॉन मॉरल अनैतिक वृत्ती है !


वर्म या मर्म चिकित्सा, संभवतः ॲक्युप्रेशर का ही एक कॉपी नकल अनुकरण इमिटेशन भ्रष्ट स्वरूप होने की संभावना है


स्वयंके आयुर्वेद शास्त्र का अनुशीलन करना तो आता ही नही है ... क्यूकी वह समजता नहीं, क्यूंकि मूल संस्कृत संहिता टीका मूल आयुर्वेद शास्त्र किसी के पल्ले पडता ही नही ... इसलिये BAMS डिग्री लेकर आयुर्वेद के नाम पर किसी भी अन्य शास्त्र की चीजों को "सिर्फ पैसाबनाने के लिए" , "लोगों को मूर्ख बनाकर" उन चीजों को "मार्केटिंग" कर कर के "बेचना" यह आत्यंतिक निंद्य त्याज्य वर्ज्य गर्हणीय त्याज्य वृत्ती है


किसी भी चीज की शास्त्रीयता उसकी लोकप्रियता या भेट जमा करने की कपॅसिटी क्राउड पुलिंग कॅपॅसिटी इस पर निर्धारित नही होता है ... शास्त्रीयता , उस शास्त्र के सिद्धांत से सुसंगत है या नही, इस पर निर्धारित होती है! बहुसंख्या पर किसी चीज की शास्त्रीयता निर्धारित करना, यह डेमोक्रसी जितना सरल नही है ! 


शास्त्रीयता यह सिद्धांत पर निश्चित होती है, न की लोकप्रियता पर और भीड पर ... सावधान रहे!

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